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यह 5 बातें जानने के बाद आप अपने बच्चों को मोबाइल देने की हिम्मत नहीं करेंगे।

क्या आप अपने बच्चों को मोबाइल खेलने के लिए, मन बहलाने के लिए या कुछ सीखाने के लिए मोबाइल दे रहे है? तो यकीन मानिए आप खुद अपने बच्चों को एक कमज़ोर इंसान बना रहे है। आप अपने बच्चों को कई बीमारियों के शिकार बना रहे है। आप अपने बच्चों के मन के विश्वास, positivity, धैर्य, साहस और कुछ कर दिखाने की चाह को खुद ही ख़त्म कर रहे है। और यदि आप बच्चों को मोबाइल दे रहे है तो आप खुद अपने बच्चे को मौत के मुंह में धकेल रहे है। इस के जिम्मेदार सिर्फ आप और आप ही है।

बच्चों को मोबाइल
बच्चों को मोबाइल

 

बच्चों को मोबाइल देखने से क्या होता है ? क्या आप यह जानते है कि एक smart phone आप के बच्चे को smart नहीं बल्कि शारीरिक, मानसिक, वैचारिक, बौद्धिक और चिकित्सक दृष्टि से कमज़ोर से भी कमज़ोर बना रहा है। अगर आप नहीं जानते तो जान लीजिए यह 5 बातें जो आप के बच्चों को मोबाइल देने के बाद खतरनाक तरीक़े से आप के बच्चों पर असर करती है।

बच्चों को मोबाइल देने से होती है यह 5 खतरनाक बातें।

अब हम आपको ऐसी 5 बातें बताएंगे जो बच्चों के घण्टों मोबाइल पर चिपके रहने से होती है। जिसे बच्चा खतरनाक तरीके से ग्रसित होता है। जिसे भविष्य में बच्चों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। इन बातों से बच्चे का भविष्य खराब हो सकता है। आगे चलकर उसका जीवन बर्बाद हो सकता है। अगर आप अपने बच्चे के उज्वल भविष्य के प्रती सजग है तो आप को जरूर इन बातों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

आप का बच्चा मोबाइल से हो सकता है भेंगेपन का शिकार

जब आप बच्चों को मोबाइल देते हो तब एक बात जरूर नोटिस करें की आप का बच्चा बिना पलकें झपकाए तो मोबाइल नहीं देख रहा है। और यही होता है जब बच्चा मोबाइल देखता है वह आखों के करीब से मोबाइल देखता है और कम से कम पलके झपकता है। अगर आपका बच्चा ऐसे करता है तो वह जरूर और जल्द ही भेंगेपन (आंख के तिरछे पन का विकार) का शिकार होने वाला है।

भेंगापन
भेंगापन आखों का गंभीर विकार है जिस में बच्चे की दोनों आंखें एकसाथ Parallel में काम नहीं कर पाती।बच्चा एक आंख से सही देख पता है तो दूसरी आंख से ठीक से नहीं देख पता इस कारण बच्चा देखने के लिए एक आंख पर ज्यादा निर्भर करता है जिस के कारण दूसरे आंख की रोशनी धीरे धीरे कम होती जाती है। और बच्चा तिरछा देखना शुरू कर देता है। वक्त बीतने पर वह आंख काम करना बंद कर देती है और बच्चा अंधा हो जाता है।

अगर आप बच्चों को मोबाइल देते है तो यकीनन आप अपने बच्चे के अमूल्य आखों से खेल रहे।

बच्चों को मोबाइल से brain damage या cancer का खतरा

आप parents यह सोचते है कि बच्चों को मोबाइल देने से बच्चा दुनिया का ज्ञान अर्जित कर लेगा। तो यह आप की सब से बड़ी भूल है। यदि आप सोचते हो कि compitition का जमाना है। हम इंटरनेट के युग में जी रहे है। बच्चों को भी इस बात से वाकिफ करने की ज्यादा जरूरत है तो यकीनन आप अपने बच्चे के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे है। क्यों की आज के इस दौर में ज्ञान अर्जित करने के कई तरीके मौजूद है।

brain tumor, brain damage, कैंसर जैसी घातक बीमारियाँ
हाल ही में एक शोध में पाया गया है कि मोबाइल जब एक्टिव मोड़ में होता है तब उस से निकलने वाले radiation की frequency काफी high होती है। जो बच्चों के दिमाग पर सीधा असर करती है। बच्चों के brain में मौजूद tissue को यह radiation घातक सिद्ध होते है। यह radiations बच्चों के nervous system को प्रभावित करते है। जिस से बच्चों में पागलपन, तनाव, मानसिक अस्वस्थता और brain tumor और कैंसर जैसे brain damage के खतरे बढ़ जाते है।

यदि आप अपने बच्चों को मोबाइल दे रहे हो तो आप अपने बच्चों को पागलपन, तनावग्रस्तता, मानसिक अस्वस्थता, brain tumor जैसे बीमारियों की ओर धकेल रहे है।

मोबाइल से बच्चों में होता है physiological addiction.

क्या आप को शराब कि लत है। या फिर किसी शराबी को आपने देखा तो होगा ही। शराब ना मिलने पर उस की स्थिति क्या होती है। इस बात से आप भलीभांति वाकिफ जरूर होंगे। तो यह भी जान लीजिए बच्चों को मोबाइल से होने वाला physiological addiction किसी शराब के लत से कम नहीं।

यदि बच्चे को कुछ देर मोबाइल ना मिल पाए तो बच्चा रोता है, गुस्सा होता है, चिड़चिड़ा होता है। वह हाथपैर मारता है, सर पटकता है, ज्यादा रोता है। अपने parents पर ग़ुस्सा होता है। उन्हे मारने से भी नहीं हिचकिचाता। मोबाइल ना मिलने पर बच्चा किसी की भी नहीं सुन पाता। वह ज्यादा aggressive हो जाता है।

अगर ऐसे लक्षण आप अपने बच्चों के पाते है तो आप का बच्चा physiological addiction का शिकार हुआ है।जिसे बच्चा अपना मानसिक संतुलन खो बैठता है। और वह चोरी करने ता खुद को हानि पहुंचाने का भी प्रयास कर सकता हैं।

मोबाइल से बच्चों का दिमागी विकास नहीं होता।

यदि व्यस्थता के कारण आप अपने बच्चों को मोबाइल देकर चुप करा रहे हो तो यह जान लो कि आप का बच्चा दिमागी तौर पर विकसित नहीं हो पाएगा। खेलना, कूदना, दौड़ना हमारे आस पास की activities को देखना, समझना और चीजों में रूचि दिखाना, उत्सुकता दिखाना यह बातें हमारे बच्चों को दिमागी तौर पर विकसित करने के लिए जरूरी है। अगर बच्चा सिर्फ मोबाइल लेकर बैठा है। और आसपास की बातों पर उसका बिल्कुल ही ध्यान नहीं है। बच्चा मोबाइल के सिवा कुछ नहीं activities नहीं करता तो यकीनन उसका दिमागी विकास नहीं हो पाएगा।

यदि आप अपने बच्चों को मोबाइल देते हो तो जान लो की आप का बच्चा दिमागी तौर पर हमेशा बच्चा ही रहेगा। वह बा कुछ सीख पाएगा और ना ही खुद को कुछ सीखने के लिए प्रेरित कर पाएगा।उसका जीवन अनुभवहीनता के कारण blank रह जाएगा। और वह जीवन में कुछ भी करने के लायक नहीं बन पाएगा।

बच्चों को मोबाइल देना हो सकता है अनिद्रा का कारण

आप bussy होने कारण अपने बच्चों को मोबाइल देते हो तो बच्चा घण्टों तक मोबाइल से खेलता है। जिसे उसको नींद की समस्या हो जाती है। मोबाइल में व्यस्तता के कारण बच्चे खुद को जगा कर रखते है। नींद आने पर भी नहीं सोते। इसलिए कुछ दिनों बाद यह आदत सी बन जाती है। और बच्चों में अनिद्रा की समस्या आ जाती है। जो बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए हानिकारक होती है।

बच्चों की लंबाई बढ़ाने के लिए जरूरी growth harmon की सक्रियता के लिए बच्चों को दिन में 10 से 12 घंटो की नींद लेना आवश्यक है। मोबाइल की लत से बच्चे पूरी नींद नहीं लेते जिस में उनकी शारीरिक growth नहीं होती।

क्या बच्चों को मोबाइल देना चाहिए?

कई लोग google पर यह सवाल पुछते है। क्या बच्चों को मोबाइल देना चाहिए? तो आप को इस का जवाब तो मिल ही गया होगा। लेकिन क्या हम सच मे बच्चों को मोबाइल से दूर रख सकते है तो यह किसी भी parents के लिए एक चुनौती हो सकती है। क्यों की मोबाइल एक ऐसा divice है जिस के तरफ़ आज का हर बच्चा, बूढ़ा, नौजवान आकर्षित होता है। बच्चों को मोबाइल से दूर रख पाना सरल और आसान तो कतई नहीं है। लेकिन बच्चों को मोबाइल से दूर रखने के लिए या उनकी यह आदत छुड़ाने के लिए हम कुछ बातों का ध्यान रख सकते है। या उनकी मोबाइल की आदत को सीमित कर सकते है।

  • बच्चों को मोबाइल देते समय समय सीमा तय कर लेनी चाहिए। बच्चों को ज्यादा देर मोबाइल use ना करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
  • बच्चों की दिलचस्पी किताबों, मजेदार कहानियों में बढ़ानी चाहिए। Parents ने ज्यादा से ज्यादा वक्त अपने बच्चों के साथ बिताना चाहिए।
  • बच्चों को अच्छे और बुरे चीज़ों में फर्क समझना चाहिए।
  • बच्चों को in door और out door खेल खेलने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
  • आप के खाली समय आप  को अपने बच्चों को कहीं घुमाने के जाना चाहिए। जिस से बच्चे नई बातों को सीख पाएं।
  • घर में बच्चों को colour, painting, gardening, ऐसे कामों में व्यस्त रखना चाहिए। जिस से बच्चे मोबाइल से भी दूर रहे और और उनकी कल्पनाओं का विस्तार भी हों।

कुछ बातें…

बच्चों के जीवन को दिशा देने का काम parents का होता है। यह आप पर पूरी तरह से depend है कि आप का बच्चा भविष्य में किस तरह से आगे बढ़ सकता है। कई parents को लगता है कि मोबाइल से बच्चे सबकुछ जान सकते है तो यह उनकी सब से बड़ी भूल है। जानना और समझना यह दोनों अलग बातें है। बच्चों को जीवन में जानकर समझने का मौका दें। उनकी कल्पनाओं का विस्तार होने दे।

हम टीवी पर या अन्य साधनों पर कई तरह की चीजे देखते है जैसे बच्चों को कोडिंग सिखाए, या इस aap के जरिए बच्चों को brilliant बनाए। ऐसे कई तरह के विज्ञापन हम देखते है और बिना सोचे बच्चों को मोबाइल थमा देते है। यह हमारी सब से बड़ी भूल है। आज के बच्चे कल के भविष्य है। आगे चलकर उन्हे हर compitition में उतरना ही है। इस के लिए हम आज उनका बचपन क्यों छीनना चाहते है।

बच्चों को उनका बचपन पूरी तरह से जीने दे। तभी तो वह शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक स्तर पर सक्षम हो पाएंगे। बच्चों को मोबाइल थमा देने से वह कल्पनाओं का विस्तार नहीं कर सकते। उन के मन कि उत्सुकता, उनकी चिकित्सक वृत्ति उनकी कल्पनाओं का विस्तार करती है। जो बच्चे दुनिया को देखकर सीख सकते है। मोबाइल से नहीं।

बच्चों को मोबाइल
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